
अभी-अभी बैडमिंटन खेलकर लौटा हूँ, और रास्ते भर पुरानी बातें मन में घूमती रहीं। मैं कोई professional या top player नहीं हूँ, लेकिन बहुत लंबे समय से खेल रहा हूँ। कई लोगों से बेहतर खेल लेता हूँ, और सबसे जरूरी बात यह है कि मुझे खेलना अच्छा लगता है। मेरे लिए बैडमिंटन का मजा किसी मुकाबले या नतीजे से कम नहीं होता। मैं इसे खेलने के लिए खेलता हूँ, fun के लिए।
बैडमिंटन की सबसे पुरानी यादों में मेरा दोस्त अमित महिंद्रा है। हम Ghaziabad के कवि नगर में रामलीला ग्राउंड के पास GDA के government indoor badminton court में खेला करते थे। Indoor court में खेलने की वजह भी सीधी थी। बाहर गर्मियों में गर्मी बहुत होती थी और हवा भी तेज चलती थी। कोर्ट के अंदर खेलना ज्यादा ठीक लगता था, और वहीं हमारी कई अच्छी यादें बनीं।
एक गर्मी की याद आज भी साफ है। अमित और मैं singles खेल रहे थे, तब हमारी उम्र करीब 14 से 16 साल के बीच रही होगी। उस उम्र में singles खेलना मजेदार लगता था, लेकिन अब मेरे लिए वह बहुत मुश्किल है। उम्र के साथ खेल भी बदलता है और अपने शरीर की सीमाएँ भी समझ आती हैं। फिर भी उस समय की बात सोचकर मन में वही पुराना उत्साह लौट आता है।
हमारे साथ चंद्रमोहन भी खेलता था। उसके पिता police में काम करते थे और वह Police Line में रहता था। जब उसने पहली बार मेरे और अमित के साथ खेला, तो वह बहुत कमजोर खिलाड़ी था। हम उसे आसानी से हरा देते थे। लेकिन करीब एक साल बाद उसने हमें Police Line में खेलने के लिए बुलाया। वहाँ उसका खेल बिल्कुल बदल चुका था। उसने हमें अच्छी फाइट दी, और शायद हरा भी दिया था, ठीक से याद नहीं। पर बदलाव इतना बड़ा था कि बात आज तक याद रह गई।
उससे मुझे एक अच्छी बात समझ आई। अगर किसी इंसान के भीतर drive हो और वह कुछ नया सीखना चाहता हो, तो वह सीख सकता है। चंद्रमोहन इसका बहुत अच्छा उदाहरण था। पहली बार खेलने पर उसे देखकर शायद किसी को नहीं लगता कि वह इतनी जल्दी इतना बेहतर हो जाएगा, लेकिन उसने कर दिखाया। खेल में भी मेहनत और सीखने की इच्छा का असर साफ दिखता है।
मेरा एक दोस्त नीरज धामा भी मेरे साथ खेलता था। वह अभी भी India में है और physiotherapist है। एक बार हम पंकज शर्मा के ALT Centre में खेलने गए थे। पंकज मेरा दोस्त था और Rajnagar में रहता था, और वहाँ उसका एक Sardar दोस्त भी खेलता था। हम अच्छा खेल रहे थे, फिर भी हार गए। उस दिन एक बात समझ में आई, home-ground advantage सचमुच होता है। अपने court की लंबाई-चौड़ाई और आसपास का माहौल मालूम होता है, इसलिए वहाँ खेलने वाले को एक edge मिल जाता है। और अगर आप किसी को उसके home ground पर हरा दें, तो आप निश्चित ही अच्छे खिलाड़ी हैं।
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो बहुत nostalgia होता है। करीब 20 साल पहले भी मैं इसी तरह खेल रहा था, जब नव्या बहुत छोटी थी या अभी पैदा भी नहीं हुई थी। UK में मैंने कई साल अलग-अलग जगहों पर खेला: पहले Margate के Hartsdown में, फिर Ramsgate में, फिर Sandwich में, और कल Canterbury में। सालों के साथ दोस्त और खेलने वाले समूह बदलते रहे, लेकिन बैडमिंटन बना रहा।
उन दिनों के कई दोस्तों के नाम याद आते हैं: किरण, जो अब हमारे बीच नहीं हैं, राकेश, निखिल, जीवन, रमनदीप, जिसे हम रॉकी कहते हैं, पिंकेश और पंकज। Hartsdown, Margate में पहली बार court book करने के लिए phone करने की बात भी याद है, उस बार पिंकेश और शायद राकेश मेरे साथ थे। समय के साथ समूह अलग-अलग दिशाओं में चले गए। कुछ लोगों से संपर्क बना हुआ है और कुछ से नहीं। पंकज के साथ मैं लंबे समय से खेलता आया हूँ।
हाल में मैंने tennis खेलना भी शुरू किया और मुझे वह भी अच्छा लगा। मेरा right shoulder थोड़ा tricky है और उसमें दर्द रहता है, एक loose body की वजह से। उसे बाद में ठीक करूँगा। अभी तो खेलने का आनंद है, और बैडमिंटन के साथ-साथ किसी दूसरे खेल को आजमाने में भी मजा आया।
कभी-कभी सोचता हूँ कि हर किसी को सिर्फ cricket या football ही क्यों खेलना चाहिए? जो खेल आपको पसंद हो, वही खेलिए। कोई game किसी दूसरे से बड़ा, छोटा या बेहतर नहीं होता; game तो game है। उसे खेल की भावना से खेलिए, team player बनकर खेलिए और उसका आनंद लीजिए। यही मेरे लिए सबसे अहम बात है।
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