इंटरनेट के साथ मेरी Journey

आजकल इंटरनेट इतनी normal सी चीज़ लगती है — हर किसी के हाथ में फोन है, हर जगह Wi-Fi है, कोई भी वीडियो कॉल कर लो, दुनिया के किसी भी कोने में बैठे इंसान से बात कर लो। लेकिन मुझे अच्छी तरह याद है कि जब यह सब शुरू हुआ था, तो यह चीज़ कितनी अजीब, कितनी चमत्कारी लगती थी। सोचा कि एक दिन बैठ के यह पूरी journey लिख डालूं कि internet के साथ मेरा रिश्ता कैसे शुरू हुआ और कैसे बदलता गया।

शुरुआत होती है कॉलेज के ज़माने से। India में internet उस वक्त बिल्कुल नया-नया था, बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता था। मुझे याद है कि मेरे दोस्त प्रतीक ने मुझसे पहली बार कहा — “चलो चैटिंग करते हैं।” मैंने पूछा, यार यह चैटिंग क्या होती है? प्रतीक school में था, twelfth class में, और computers के साथ थोड़ा ज़्यादा comfortable था, जबकि मैं college में biology का student था और मैंने कभी computer इस्तेमाल भी नहीं किया था। computer उस वक्त एक luxury हुआ करता था — या तो आपके parents आपको पढ़ाई के लिए दिला दें, या फिर खुद अफोर्ड करो। हमारे घर में तो था ही नहीं।

प्रतीक मुझे एक cyber café ले गया, और हम एक chat room में घुसे। मुझे याद है कि वहां लोग पूछते थे “ASL?” — as in age, sex, location। मज़े की बात यह है कि मुझे website address टाइप करना भी नहीं आता था, “dot com” की जगह मैं क्या लिख रहा था याद नहीं, पर page खुल ही नहीं रहा था ठीक से। आखिरकार किसी तरह खुला, और जिस पल वह screen पर आया, मैं पूरी तरह amazed हो गया — गॉबस्मैक्ड, चमत्कृत। सोचो, कोई इंसान अमेरिका में बैठा है, कोई दुनिया के किसी कोने में बैठा है, और मैं उसे एक message टाइप कर रहा हूं और वह उस तक पहुंच रहा है, बस ऐसे ही।

आज के बच्चों के लिए phone या internet बिल्कुल normal चीज़ है, उन्हें कभी अजीब नहीं लगेगा। पर सोचो, जब सबसे पहली बार टेलीफोन आया होगा, पचास-साठ-सत्तर साल पहले, तो जिसने पहली बार किसी की आवाज़ दूर से सुनी होगी, उसे भी बिल्कुल यही एहसास हुआ होगा — कि कोई इंसान हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा है और मैं उसकी आवाज़ सुन पा रहा हूं। या जब पहली बार टीवी आया होगा, और लोगों ने दूर बैठे इंसान की तस्वीर अपने सामने देखी होगी। हर नई technology यही चमत्कार लेकर आती है। मैं भी उसी चमत्कार से गुज़र रहा था।

धीरे-धीरे मैंने अपनी पहली login id बनाई — usa.net पर, नाम रखा nitin_bugs, कुछ fancy सा लग रहा था सुनने में। फिर India में जगह-जगह छोटे-छोटे cyber cafés खुलने लगे, एक बहुत बड़ा trend बन गया था वह। लोग आते, घंटों browsing करते — क्या कर रहे हैं, किसी को पता नहीं, मुझे भी नहीं पता था मैं खुद क्या कर रहा हूं, बस इतनी खुशी थी कि मैं इस नई दुनिया से जुड़ा हुआ हूं। Google से पहले कुछ और search engines हुआ करते थे — Lycos, AltaVista — अब शायद वे रहे भी नहीं। मुझे याद है, मैंने पहली बार search bar में टाइप किया “Amitabh Bachchan” — इतने popular आदमी हैं हमारे यहां — और कुछ pages खुल गए उनके बारे में। मैं फिर उसी बात से हैरान था कि इतना कुछ है internet पर।

एक बार मैं Aligarh गया, अपने मौसा राजेंद्र जी के यहां। उनके बेटे अमित को, मेरे cousin को, curiosity थी कि यह internet आखिर है क्या चीज़। मैं उसे cyber café ले गया, उसे दिखाया, Hindi में एक message भी टाइप करके दिखाया। हर इंसान जानना चाहता था यह नई चीज़ क्या है। उस वक्त dial-up हुआ करता था, speed बहुत धीमी थी, पर था तो सही। College में भी internet इतना ज़्यादा available नहीं था, और हम तो biology stream वाले थे, हमारे लिए तो और भी कम था।

जब मैंने decide किया कि masters करने के लिए UK जाऊंगा — शायद सच कहूं तो यह एक बहाना भी था कुछ नया करने का, देश से बाहर निकलने का — उस वक्त भी मुझे attachment भेजना तक नहीं आता था। cyber café में बैठा रहता, Yahoo mail इस्तेमाल करता, और जिस भाई का वह café था, वही मेरे लिए attachment attach कर देता। Yahoo Messenger भी उस वक्त काफी चलता था, लोग उस पर ही बात करते थे, कभी-कभी video-audio भी हो जाती थी। यही एक ज़रिया था उस वक्त दुनिया से जुड़े रहने का।

फिर मैं पहुंचा Keele University, UK। और वहां जो बदलाव देखा, वह मेरे लिए एक अलग ही level का experience था। University में हर कमरे को dedicated broadband connection मिला हुआ था। मैंने एक computer लिया, और सोचो — computer भी आपका अपना, और internet भी constant, free, हमेशा available, पलंग के बगल में रखा हुआ। यह चीज़ शब्दों में बयान करना मुश्किल है। इससे पहले मैं छुटपुट-छुटपुट करके cyber café में इस्तेमाल कर पाता था, और अब यह मेरे कमरे में ही मौजूद था, हमेशा के लिए।

पर दुनिया से बात करने के लिए दूसरी तरफ भी उतना ही internet चाहिए होता है, और India में उस वक्त लोगों के पास यह सुविधा बहुत limited थी। घर वालों से बात करने के लिए वे cyber café जाते, या फिर STD बूथ से फोन करते — आज तो वे बूथ भी ख़त्म हो चुके हैं, पर उस ज़माने में हर सड़क पर वे काले-पीले बोर्ड दिखते थे, STD-ISD लिखे हुए। घर वाले मुझे फोन कर लेते, पर देख नहीं पाते थे, फोटो नहीं भेज सकते थे। कभी-कभी Yahoo Messenger पर जुड़ पाते, cyber café वाला जैसे-तैसे सेट कर देता, आधी-अधूरी सी बात हो पाती थी। पर उतने में भी एक सुकून था — कि चलो, देख तो लिया।

Keele में dedicated internet मिलने के बाद मैंने खूब explore किया। YouTube मुझे अच्छी तरह याद है सामने आना। पर उस वक्त India से related content बहुत कम था, ज़्यादातर national media ही था। मुझे याद है कि Doordarshan की एक website थी जो live TV दिखाती थी — DD Live — और यह बात मेरे लिए हैरान करने वाली थी। मेरे एक दोस्त आसिम थे, Pakistan से, मैंने उन्हें यह दिखाया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। मेरे एक और दोस्त शेर अली अरबाब, वह भी Pakistan से थे, पर थोड़े ज़्यादा open और liberal थे। उन्होंने कहा, India information technology में बहुत आगे है — और सच में था भी।

Audio-video content की बहुत कमी थी उस वक्त, और मैं India का FM बहुत miss कर रहा था क्योंकि वह एक पूरी pop culture का हिस्सा था। बड़ी-बड़ी companies ने अपनी websites बनानी शुरू कर दी थीं, और मुझे याद है Aaj Tak की website पर जाकर clips देखना — Shams Tahir Khan की crime से जुड़ी वे छोटी-छोटी clips। गाने सुनने के लिए raaga.com जैसी websites थीं। और एक website थी Bollygrounds.net, जहां पैसे देकर चौबीस-अड़तालीस घंटों के लिए pirated movies देखने को मिल जाती थीं। उस समय से अब तक मूव करते-करते बहुत कुछ सीखा — शायद मेरा nature ही explore करने वाला रहा है। धीरे-धीरे BBC Hindi से भी जुड़ा, उसकी website सुनता, और आज तक सुनता हूं।

यह journey सोचने बैठूं तो इतनी सारी कहानियां निकल आती हैं, एक पूरी किताब लिखी जा सकती है इस पर। पर यह experience वाकई अद्भुत था — मैंने internet को उसके बिल्कुल शुरुआती, budding दिनों में देखा, और फिर उसे पूरी तरह बदलते हुए भी देखा। आज हम AI की बात कर रहे हैं, और ऐसी-ऐसी चीज़ों की जो उस वक्त सोची भी नहीं जा सकती थीं। यह बदलाव रुकने वाला नहीं है, यह ऐसे ही चलता रहेगा — technology का काम ही यही है, लगातार बदलते रहना, लगातार evolve होते रहना।

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